राज्यका निर्देशक सिद्धान्त
धारा ५१ राज्य नीति
धारा ५१ राज्य नीति
निर्देशक सिद्धान्त भनेको के?
परिभाषा र महत्त्व
• संविधानले सरकारलाई दिएका मार्गदर्शक उद्देश्यहरू
• न्यायालयमा प्रचलन गराउन मिल्दैन — नीतिगत दायित्व मात्र
• तर सरकारले कानून बनाउँदा र नीति लिँदा यसलाई पालना गर्नुपर्छ
• मौलिक हकसँग अन्तरसम्बन्धित — हक र दायित्वको पूरकता
धारा ५१ का प्रमुख नीतिहरू
| विषय | धारा ५१ (क–प) | मुख्य कुरा |
|---|---|---|
| राष्ट्रिय एकता | क | राष्ट्रिय स्वाधीनता, सार्वभौमिकता |
| राजनीतिक | ख | बहुदलीय लोकतन्त्र, आवधिक निर्वाचन |
| सामाजिक न्याय | ग | समानुपातिक समावेश, उत्थान |
| आर्थिक | घ | समावेशी विकास, गरिबी निवारण |
| कृषि भूमि | ङ | वैज्ञानिक भूमि सुधार |
| श्रम र रोजगार | च | रोजगारको हक, न्यूनतम ज्याला |
| स्वास्थ्य | छ | स्वास्थ्य सेवाको सार्वभौमिक पहुँच |
| शिक्षा | ज | निःशुल्क, गुणस्तरीय शिक्षा |
| महिला | झ | सबै क्षेत्रमा समान सहभागिता |
| सामाजिक सुरक्षा | ञ | वृद्ध, बालबालिका, अपाङ्गता |
| वातावरण | ट | वातावरण संरक्षण, दिगो विकास |
| परराष्ट्र | ठ | पञ्चशील, NAM, UN चार्टर |
भारतसँग तुलना: भारतको संविधान (धारा ३६–५१) मा निर्देशक सिद्धान्त — नेपालले यही अवधारणा अवलम्बन गरेको। तर नेपालमा धेरै हकहरू प्रचलनयोग्य बनाइएको छ।
Quick Recall:
• निर्देशक सिद्धान्त: भाग ४, धारा ५०–५५
• राज्यको दायित्व: धारा ५३ — समय सीमामा कार्यान्वयन
• मौलिक कर्तव्य: धारा ४८ — नागरिकका दायित्व
• कार्यान्वयन जाँच: सर्वोच्च न्यायालयद्वारा (सीमित)
• निर्देशक सिद्धान्त: भाग ४, धारा ५०–५५
• राज्यको दायित्व: धारा ५३ — समय सीमामा कार्यान्वयन
• मौलिक कर्तव्य: धारा ४८ — नागरिकका दायित्व
• कार्यान्वयन जाँच: सर्वोच्च न्यायालयद्वारा (सीमित)
सम्भावित प्रश्नहरू:
१. राज्यका निर्देशक सिद्धान्त र मौलिक हकबीच के भिन्नता छ? (५ अंक)
२. धारा ५१ को आर्थिक विकाससम्बन्धी निर्देशक सिद्धान्त र नेपालको वर्तमान आर्थिक नीतिबीचको सम्बन्ध विश्लेषण गर्नुस्। (१० अंक)
१. राज्यका निर्देशक सिद्धान्त र मौलिक हकबीच के भिन्नता छ? (५ अंक)
२. धारा ५१ को आर्थिक विकाससम्बन्धी निर्देशक सिद्धान्त र नेपालको वर्तमान आर्थिक नीतिबीचको सम्बन्ध विश्लेषण गर्नुस्। (१० अंक)